उतनी दूर मत ब्याहना- निर्मला पुतुल
कविता में बेटी अपने पिता से कहती है कि उसका विवाह ऐसी जगह न करें जहाँ उससे मिलने के लिए उन्हें अपनी बकरियाँ बेचनी पड़ें, जहाँ प्रकृति न हो, जहाँ इंसानों से अधिक ईश्वर हों, और जहाँ रिश्तों से अधिक भौतिकता का महत्व हो। वह ऐसे जीवनसाथी की कल्पना करती है जो मेहनती, संवेदनशील, प्रकृति-प्रेमी और बराबरी में विश्वास करने वाला हो। कविता का केंद्रीय विचार यह है कि स्त्री को विवाह में केवल पति नहीं, बल्कि मानवीय सम्मान, प्रेम, साझेदारी, सांस्कृतिक जुड़ाव और अपनी पहचान को सुरक्षित रखने का अधिकार चाहिए। कविता में बार-बार जंगल, नदी, पहाड़, आँगन, मुरगे की बाँग, महुआ, पलाश और खेतों का उल्लेख आता है। दूसरी ओर बड़ी सड़कें, मोटरगाड़ियाँ और ऊँची इमारतें हैं।
चर्चा प्रश्न
- शादी को लेकर बेटी की सोच आधुनिक (modern) है या पारंपरिक traditional?
- क्या कविता शहरी जीवन की आलोचना (criticise) करती है?
- प्रकृति और मनुष्य के संबंध (relation) को कविता कैसे प्रस्तुत करती है?
- कविता में आदिवासी संस्कृति की कौन-कौन सी विशेषताएँ दिखाई देती हैं?
- कविता में आदर्श पुरुष में क्या-क्या गुण होने चाहिए?

