उतनी दूर मत ब्याहना- निर्मला पुतुल
कविता में बेटी अपने पिता से कहती है कि उसका विवाह ऐसी जगह न करें जहाँ उससे मिलने के लिए उन्हें अपनी बकरियाँ बेचनी पड़ें, जहाँ प्रकृति न हो, जहाँ इंसानों से अधिक ईश्वर...
कविता में बेटी अपने पिता से कहती है कि उसका विवाह ऐसी जगह न करें जहाँ उससे मिलने के लिए उन्हें अपनी बकरियाँ बेचनी पड़ें, जहाँ प्रकृति न हो, जहाँ इंसानों से अधिक ईश्वर...
हमारा रक्त‘ यह इधर बहा मेरे भाई का रक्त वह उधर रहा उतना ही लाल तुम्हारी एक बहिन का रक्त! बह गया, मिलीं दोनों धारा जा कर मिट्टी में हुईं एक पर धरा न...
आदमी मरने के बाद कुछ नहीं सोचता। आदमी मरने के बाद कुछ नहीं बोलता। कुछ नहीं सोचने और कुछ नहीं बोलने पर आदमी मर जाता है। – उदय प्रकाश ...
हताशा से एक व्यक्ति बैठ गया था व्यक्ति को मैं नहीं जानता था हताशा को जानता था इसलिए मैं उस व्यक्ति के पास गया मैंने हाथ बढ़ाया मेरा हाथ पकड़कर वह खड़ा हुआ मुझे...
बसंती हवा Spring Wind हवा हूँ, हवा मैं I am the wind बसंती हवा हूँ। I am spring wind सुनो बात मेरी – ...
दुनिया की चिन्ता world’s worry छोटी सी दुनिया small world बड़े-बड़े इलाके ...
फटे जूते-सी Similar to torn shoes ज़िन्दगी सीने के लिए ...
https://www.sarita.in/poem/hindi-kavita-darwaza दरवाज़ा घर बहुत बड़ा था लेकिन दरवाज़ा बहुत छोटा धूप, हवा, बारिश सब का आना था मना घर में रहते थे बस चंद लोग एकदम अपरिचित जैसे रेलगाड़ी के किसी डब्बे...