आदमी और शेर की कहानी

एक बार की बात थी. एक जंगल में एक आदमी जा रहा था. उसने देखा कि एक शेर पिंजरे में बंद था. शेर ने आदमी को देखा और कहा,

“मेरा पिंजरा खोल दो.”

आदमी ने कहा,
“मैं नहीं खोलूँगा, क्योंकि तुम मुझे खा जाओगे.”

शेर ने कहा,
“नहीं, मैं तुम्हें नहीं खाऊँगा, क्योंकि तुम तो मेरे दोस्त हो. मैं तुम्हें कभी नहीं खाऊँगा.”

आदमी ने फिर कहा,
“नहीं भाई, मुझे माफ करो. मैं पिंजरा नहीं खोलूँगा.”

शेर रोने लगा और बोला,
“मुझे बाहर आने दो, नहीं तो मैं मर जाऊँगा.”

आदमी ने देखा कि शेर बहुत उदास था. उसने थोड़ा सोचा और फिर पिंजरा खोल दिया.
शेर बाहर आया और बोला,
“मुझे माफ करो, लेकिन मैं पिंजरे में इतने दिनों से था. अब मुझे बहुत भूख लगी है. मैं तो तुम्हें खाऊँगा.”

यह सुनकर आदमी घबरा गया और बोला,
“लेकिन तुमने तो कहा था कि मुझे नहीं खाओगे.”

शेर बोला,
“मैं तो आदमी को ही खाता हूँ. अगर आदमी को नहीं खाऊँगा तो जिंदा कैसे रहूँगा? तुम ही गलत हो, तुमने मेरी बात मानी क्यों?”

तभी वहाँ एक लोमड़ी आई. आदमी ने उसे रोका और कहा,
“रुको लोमड़ी, मुझे बताओ क्या किसी की मदद करना बुरी बात है? मैंने शेर की मदद की, उसका पिंजरा खोला, क्योंकि वह कई दिनों से अंदर था.”

लोमड़ी ने सोचा और फिर कहा,
“सब ठीक है, पर मुझे समझ नहीं आया कि इतना बड़ा शेर इस छोटे से पिंजरे में कैसे आया? पिंजरा तो छोटा है और शेर बड़ा.”

शेर को यह बात सुनकर गुस्सा आया और वह बोला,
“मैं ऐसे ही अंदर आया था.”
और वह दिखाने के लिए फिर से पिंजरे में चला गया.

लोमड़ी ने तुरंत पिंजरे का दरवाजा बंद कर दिया.
आदमी और लोमड़ी वहाँ से चले गए.

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